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झाड़ोल और फलासिया में डेंटल इम्प्लांट

जबड़े में लगाए जाने वाले फिक्स दाँत और दाढ़ — कोई निकालने वाली बत्तीसी नहीं।

एमएस उदयपुर डेंटल क्लिनिक में टूटे आगे के दाँतों के उपचार से पहले और बाद की तस्वीर

डेंटल इम्प्लांट टाइटेनियम का एक छोटा स्क्रू होता है जिसे गिरे हुए दाँत की जड़ की जगह जबड़े की हड्डी में लगाया जाता है। जब हड्डी उसे मजबूती से पकड़ लेती है, तब उसके ऊपर कैप (क्राउन) चढ़ा दी जाती है। नतीजा असली दाँत जैसा होता है — आप सामान्य रूप से चबाते हैं, सामान्य रूप से साफ करते हैं, और रात में कुछ निकालना नहीं पड़ता।

इम्प्लांट कब सही विकल्प है

  • एक दाँत या दाढ़ गिर गई है और आप ब्रिज के लिए पास के दाँत घिसवाना नहीं चाहते।
  • कई दाँत गिर चुके हैं और निकालने वाली बत्तीसी बार-बार खिसकती या चुभती है।
  • वर्षों में जबड़े की हड्डी घटने से पूरी बत्तीसी ढीली हो गई है।
  • दाँत मसूड़े के अंदर तक टूट गया है और उसे बचाया नहीं जा सकता।

इलाज कैसे होता है

  • जाँच और एक्स-रे, यह देखने के लिए कि हड्डी कितनी उपलब्ध है।
  • सुन्न करने वाले इंजेक्शन के साथ इम्प्लांट लगाया जाता है — आप जागते रहते हैं पर जगह पूरी सुन्न रहती है।
  • लगभग दो से चार महीने का समय, जिसमें हड्डी इम्प्लांट से जुड़ जाती है।
  • ऊपर कैप या ब्रिज लगाकर चबाने की पकड़ ठीक की जाती है।

क्या दर्द होता है?

इम्प्लांट लगाते समय जगह सुन्न कर दी जाती है, इसलिए दबाव महसूस होता है, दर्द नहीं। ज़्यादातर मरीज़ अगले दो दिनों को दाँत निकलवाने जैसा बताते हैं — साधारण दर्द की दवा से संभल जाता है। सूजन कुछ दिनों में उतर जाती है।

इम्प्लांट की देखभाल

इम्प्लांट में कीड़ा नहीं लगता, लेकिन उसके आसपास का मसूड़ा असली दाँत के मसूड़े की तरह ही खराब हो सकता है। दिन में दो बार ब्रश करें, दाँतों के बीच सफाई करें, और साल में एक बार जाँच करवाएँ। तंबाकू किसी भी रूप में इम्प्लांट खराब होने का सबसे बड़ा कारण है, इसलिए उसे छोड़ना यहाँ सबसे ज़्यादा जरूरी है।

खर्च

खर्च इस पर निर्भर करता है कि कितने इम्प्लांट लगाने हैं, कौन सी कंपनी का इम्प्लांट है, और हड्डी भरने की जरूरत है या नहीं। एक्स-रे के बाद, इलाज शुरू करने से पहले हम आपको लिखित अनुमान देंगे। वर्तमान शुल्क जानने के लिए क्लिनिक पर कॉल करें।

यह इलाज कहाँ होता है

इस इलाज के बारे में मरीज़ों के सवाल

डेंटल इम्प्लांट कितने साल चलता है?

ठीक से लगाया गया और साफ रखा गया डेंटल इम्प्लांट 15 साल या उससे ज़्यादा चल सकता है, और कई तो जीवनभर चलते हैं। इम्प्लांट में खुद कीड़ा नहीं लगता। उसकी उम्र घटाने वाली चीज़ें हैं — उसके आसपास मसूड़ों की बीमारी, बेकाबू शुगर, और तंबाकू। झाड़ोल या फलासिया में MS उदयपुर डेंटल क्लिनिक पर हर साल जाँच करवाने से दिक्कत शुरू होते ही पकड़ में आ जाती है।

क्या डेंटल इम्प्लांट के लिए उम्र की कोई सीमा है?

ऊपर की कोई उम्र सीमा नहीं है — उम्र से ज़्यादा मायने रखती है शरीर की सेहत, और सत्तर की उम्र में भी इम्प्लांट सफलतापूर्वक लगते हैं। नीचे की सीमा मायने रखती है: जबड़े का बढ़ना पूरा होने तक इम्प्लांट नहीं लगाया जाता, जो आमतौर पर लड़कियों में 18 और लड़कों में कुछ देर से होता है।

शुगर होने पर क्या इम्प्लांट लगवा सकते हैं?

हाँ, बशर्ते आपकी शुगर ठीक से काबू में हो। नियंत्रित शुगर वालों में सफलता की दर लगभग बाकी लोगों जैसी ही होती है। बेकाबू शुगर घाव भरने में देरी करती है और इम्प्लांट खराब होने का खतरा बढ़ाती है, इसलिए सर्जरी की योजना बनाने से पहले हम आपकी हाल की शुगर रिपोर्ट देखना चाहेंगे।

एक दाँत गिरा हो तो इम्प्लांट या ब्रिज — क्या बेहतर है?

इम्प्लांट सिर्फ गिरे हुए दाँत की जगह लेता है और दोनों तरफ के स्वस्थ दाँतों को छूता नहीं। ब्रिज जल्दी बन जाता है और आमतौर पर सस्ता पड़ता है, लेकिन उसे टिकाने के लिए बगल के दो दाँतों को हमेशा के लिए घिसना पड़ता है। अगर बगल के दाँत स्वस्थ हैं, तो लंबे समय के लिए इम्प्लांट आमतौर पर बेहतर विकल्प है।

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पहले दंत चिकित्सक से बात करें

अपने पुराने एक्स-रे या पर्चे साथ ले आएँ। इलाज शुरू करने से पहले आपको बताया जाएगा कि समस्या क्या है और किस विकल्प का कितना खर्च है।

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